Detailed Notes on Shodashi
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दिव्यौघैर्मनुजौघ-सिद्ध-निवहैः सारूप्य-मुक्तिं गतैः ।
षट्कोणान्तःस्थितां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥६॥
ध्यानाद्यैरष्टभिश्च प्रशमितकलुषा योगिनः पर्णभक्षाः ।
Worshippers of Shodashi request don't just product prosperity but will also spiritual liberation. Her grace is claimed to bestow the two worldly pleasures as well as signifies to transcend them.
केवल आप ही वह महाज्ञानी हैं जो इस सम्बन्ध में मुझे पूर्ण ज्ञान दे सकते है।’ षोडशी महाविद्या
शैलाधिराजतनयां शङ्करप्रियवल्लभाम् ।
षोडशी महात्रिपुर सुन्दरी का जो स्वरूप है, वह अत्यन्त ही गूढ़मय है। जिस महामुद्रा में भगवान शिव की नाभि से निकले कमल दल पर विराजमान हैं, वे मुद्राएं उनकी कलाओं को प्रदर्शित करती हैं और जिससे उनके कार्यों की और उनकी अपने भक्तों के प्रति जो भावना है, उसका सूक्ष्म विवेचन स्पष्ट होता है।
सेव्यं गुप्त-तराभिरष्ट-कमले सङ्क्षोभकाख्ये सदा ।
॥ अथ श्रीत्रिपुरसुन्दरी पञ्चरत्न स्तोत्रं ॥
The Tripurasundari temple in Tripura state, locally known as Matabari temple, was first founded by Maharaja Dhanya Manikya in 1501, although it was possibly a spiritual pilgrimage website for many hundreds of years prior. This peetham of ability was in the beginning meant to become a temple for Lord Vishnu, but on account of a revelation which the maharaja experienced in a desire, He commissioned and set up Mata Tripurasundari in its chamber.
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी कवच स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari kavach
The planet, as being a manifestation of Shiva's consciousness, holds The true secret to liberation when a person realizes more info this essential unity.
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में
यहां पढ़ें त्रिपुरसुन्दरी हृदय स्तोत्र संस्कृत में – tripura sundari hriday stotram